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How to Check Jaggery is Chemical Free: हेल्थ के लिए खतरनाक होता है केमिकल वाला गुड़, इस तरह पहचानें मिलावटी है या अच्छा

नई दिल्ली: How to Check Jaggery is Chemical Free: मिलावटी या केमिकल वाला गुड़ हेल्थ के लिए बहुत हानिकारक होता है। ऐसे में बाजारों में भी बहुत सारी किस्मों में गुड़ मिल रहा है। जो मिलावटी और केमिकल युक्त हो सकता हैं। वैसे गुड़ सेहत के लिए अच्छा होता है, लेकिन मिलावटी गुड़ खाना हेल्थ के लिए बहुत नुकसान दायक होता है। लेकिन जानकारी के अभाव में लोग मिलावटी गुड़ खरीद कर ले आते हैं। ऐसे में आज हम आपको मिलावटी या केमिकल फ्री गुड़ की पहचान कैसे करें, इस बारे में बता रहे हैं। जिससे की आप मिलावटी गुड़ खरीदने और खाने से बच जाएं।

शेफ पंकज भदौरिया ने बताया- कैसे करें शुद्ध और अशुद्ध गुड़ गुड़ की पहचान
जानी मानी शेफ पंकज भदौरिया ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर हाल ही में एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो असली-नकली गुड़ की पहचान कैसे करें, इस बारे में बता रही हैं। इस वीडियो में उन्होंने एक ऐसी ट्रिक बताई है जिसके जरिए आप आसानी से शुद्ध और अशुद्ध गुड़ गुड़ की पहचान कर सकते हैं।

गुड़ में इस तरह से की जाती है मिलावट
शेफ पंकज भदौरिया का कहना है कि गुड़ को साफ करने के लिए सोडा और कुछ केमिकल्स का यूज किया जाता है। शुद्ध गुड़ का रंग वास्तव में डार्क ब्राउन होता है। गुड़ में हल्का सा सफेद या पीलापन होना बताता है कि इसमें केमिकल का इस्तेमाल किया गया है। सफेद या लाइट ब्राउन गुड़ में केमिकल या आर्टिफिशियल रंगों का इस्तेमाल किया जाता है।

वजन और चमक के लिए मिलाते हैं केमिकल
शेफ पंकज भदौरिया का कहना है कि गुड़ में कैल्शियम कार्बोनेट और सोडियम बाइकार्बोनेट का भी यूज किया जा सकता है। कैल्शियम कार्बोनेट का यूज गुड़ का वजन बढ़ाने के लिए किया जाता है, जबकि सोडियम बाइकार्बोनेट का यूज गुड़ को ज्यादा चमकदार बनाया जाता है।

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डार्क ब्राउन या काले रंग वाला ही गुड़ खरीदें
शेफ पंकज भदौरिया मुताबिक, काला या डार्क ब्राउन रंग का गुड़ ही केमिकल फ्री होता है। दरअसल गन्ने के रस को उबालने पर उसका रंग काला हो जाता है। इस गुड़ में वजन बढ़ाने और ज्यादा चमकदार बनाने के लिए किसी केमिकल्स का यूज नहीं होता है। इसलिए जब भी गुड़ खरीदें, डार्क ब्राउन या काले रंग वाला ही खरीदें।

जानें गुड़े खाने के फायदे
गुड़ खाने से पाचन समस्या, एनीमिया की रोकथाम, लीवर डिटॉक्सिफिकेशन में सुधार होता है। जबकि चीनी से मोटापा, हृदय रोग, डिप्रेशन, टाइप-2 डायबिटीज, लिवर रोग, डिमेंशिया और कुछ प्रकार के कैंसर होने की संभावना बनी रहती है।



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