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जानें पैरालिसिस क्या है और फालिश गिरने पर कैसा होना चाहिए आपका डाइट प्लान

लखनऊ.पैरालिसिस/ लकवा/ फालिश (Paralysis) : पैरालिसिस स्ट्रोक के बाद रोगी अगले 3-4 महीने तक ठीक होता है, सुधार रुकने पर समस्या फिर से उत्पन्न हो जाती है। इसलिए अंगों की खोई हुई गति को वापस उसी तरीके से ट्रेंड करना बहुत जरुरी है। पर क्या आप जानते हैं इसे घर में भी एक अच्छी डाइट के साथ सुधारा जा सकता है| अगर नहीं तो आइये जानते हैं इसके बारे में

पैरालिसिस या लकवा या फालिश का अटैक क्या होता है(What is Paralysis attack)
पैरालिसिस या लकवा एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसके कारण शरीर का कोई अंग या आधा हिस्सा अपना काम करना बंद कर देता है और उस हिस्से में कोई भी हलचल महसूस नहीं होती है। इस बीमारी के कारण मुंह, होंठ या संबंधित अंग टेढ़े हो जाते हैं। पर अगर सही डाइट और दिनचर्या हो तो इसके असर को काम किय अजा सकता है| आइये जानते हैं कि लकवा(paralysis) के मरीजों को अपने खानपान में क्या बदलाव लाने चाहिए|

पैरालिसिस के लक्षण (Symptoms of Paralysis attack)
-चेहरे के एक तरफ अचानक कमजोरी, हाथ में कमजोरी महसूस होना
-चेहरे के एक तरफ अचानक दर्द होना
-गंभीर दुर्घटना या चोट के बाद पैरालिसिस
-अगर चेहरे, हाथ या पैर में कमजोरी आती-जाती रहती है तो इसे मल्टीपल स्कोलियोसिस अटैक कहते हैं|

पैरालिसिस के मरीज क्या खाएं(What to eat in paralysis)
पैरालिसिस के मरीज गेहूं, जौ, बाजरा, दालें, हरी सब्जियां, पत्ता गोभी, ब्रोकोली, अनार, फालसा, अंगूर, हल्दी, सेब, पपीता, संतरा, चेरी, तरबूज,और चीजें जैसे हींग, अजवाइन, सिरका, तिल, घी, दूध, नारियल पानी, ग्रीन टी, जैतून का तेल, बादाम, अदरक, लहसुन, अलसी के बीज का इस्तेमाल कर सकते हैं|

पैरालिसिस के मरीज क्या ना खाएं (What should Paralytic patient not eat)
अनाज- नया अनाज, मैदा
दालें- अरहर, मटर, चना
फल एवं सब्जियां- आलू, टमाटर, नींबू, जामुन, करेला, केला, भिंडी, फूलगोभी
अन्य- तैल एवं घी का अत्यधिक सेवन, सुपारी, अत्यधिक नमक, पूरी, समोसा, चाट-पकोड़ा, मक्खन, आइसक्रीम, चाय, काफी
भारी भोजन- छोले, राजमा, उड़द चना मटर सोयाबीन, बैंगन, कटहल, ठंडा भोजन, पनीर, चॉकलेट, तला हुआ और आसानी से ना पचने वाले खाने

सख्त मना(Strictly avoiding things for Paralytic Patient)- तैलीय मासलेदार भोजन, मांसाहार एवं मांसाहार सूप, अचार, अधिक नमक, कोल्ड ड्रिंक्स, बेकरी उत्पाद, शराब, फ़ास्ट फ़ूड, शीतल पेय, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ, जंक फ़ूड

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लकवा के इलाज के दौरान की जीवनशैली (Routine of paralytic patient during paralysis stroke)
सिर की मालिश करें, पैरों को हल्के- हल्के दबाएं और आराम करें।

पैरालिसिस के इलाज के दौरान ध्यान रखने वाली बातें (Things to keep in mind during the treatment of paralysis)
ताजा एवं हल्का गर्म भोजन करें, भोजन धीरे धीरे शांत स्थान मे शांतिपूर्वक करें, सकारात्मक एवं खुश मन रखें, तीन से चार बार भोजन जरूर करें, किसी भी समय का भोजन छोड़ें नहीं और ज्यादा खाने से परहेज करें, भोजन को अच्छी प्रकार से चबाकर एवं धीरे–धीरे खाएं, भोजन करने के बाद 3-5 मिनट टहलें, सूर्यादय से पहलें उठें (5:30 – 6:30 am), प्रतिदिन दो बार ब्रश करें और नियमित रूप से जीभ की सफाई करें, भोजन लेने के बाद थोड़ा टहलें और रात में सही समय पर नींद लें (9- 10 PM)

पैरालिसिस के मरीजों के लिए डाइट प्लान (Diet Plan for Paralysis Patient)
पैरालिसिस के मरीजों के लिए एक नार्मल डाइट प्लान बताया जा रहा है जिसे एलर्जी अगर है तो वह इसे इग्नोर भी कर सकता है|
-सुबह सुबह उठकर बिना मुंह धोये एक ग्लास गुनगुना पानी पीना चाहिए।
-सुबह 8 से 8:30 बजे नाश्ते में एक कप दूध, दलिया, पोहा, उपमा, अंकुरित अनाज, एक कटोरी सब्जी, फलो का सलाद जैसे केला, सेब, पपीता, चेरी, तरबूज, आम, अनार आदि का सेवन करना चाहिए|
-दिन का खाना 12.30 से 1:30 बजे के बीच में एक कटोरी चावल, हरी सब्जी, दाल, एक प्लेट सलाद ले सकते है।
-शाम के नाश्ते 5 से 6 बजे के बीच में एक कप हर्बल टी और सब्जियों का सूप पीना चाहिए।
-रात के खाने को 7 से 8 बजे के बीच में एक कटोरी हरी सब्जी, एक कटोरी दाल, एक या दो पतली रोटियां ले सकते है।
-रात को सोने से पहले एक ग्लास दूध के साथ अश्वगंधा चूर्ण ले सकते है।

योग और आसन से करें पैरालिसिस का इलाज(Yoga and Exercise for paralytic patient)
योग प्राणायाम एवं ध्यान: भस्त्रिका, कपालभांति, बाह्यप्राणायाम, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, उदगीथ, उज्जायी, प्रनव जप
आसन: सूक्ष्म व्यायाम, उत्तानपादासन, मर्कटासन, भुजंगासन, शवासन, सर्वांगासन

पैरालिसिस का उपचार फिजियोथैरेपी से(Physiotherapy in Paralysis)
पैरालिसिस का उपचार आमतौर पर लक्षणों से निपटने और मांसपेशियों की गति को फिर से वापस लाने के लिए किया जाता है। फिजियोथैरेपी से पैरालिसिस के मरीजों को काफी हद तक मदद मिलती है। इसमें जब तक मरीज के खोये हुए मूवमेंट्स वापस नहीं आते तब तक डॉक्टर भी मरीज को फसिओथेरपी के सेशन को जारी रखने के लिए कहते हैं| इस उपचार के लिए बहुत धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति की जरुरत होती है|

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