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गुरु मनीष - एक कुशल लीडर एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ, जो आयुर्वेद के जरिए करते हैं पूर्ण शारीरिक और मानसिक कल्याण की बात

जीरकपुर/ चंडीगढ़, अगस्त 31, 2021 गुरु मनीष, एक जाने-माने युवा एवं सक्रिय आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ, जिन्होंने स्वयं को एक विचारक के रूप में भी स्थापित किया है, ने प्राचीन जड़ी-बूटियों पर आधारित भारत के औषधि शास्त्र या वेद- आयुर्वेद के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए खुद को पूरी तरह से प्रतिबद्ध किया है। बचपन में गुरु मनीष काफी अस्वस्थ रहते थे। समय बीतने के साथ, उन्होंने महसूस किया कि उनके शरीर को सिर्फ दवाइयां नहीं बल्कि कुछ ऐसा भी चाहिए जोकि उनके शरीर की आवश्यकता है। उन्हें सिर्फ ठीक होने की नहीं, बल्कि उपचार की भी आवश्यकता है। जब उन्हें आयुर्वेदिक उपचार से परिचित कराया गया और उन्होंने अपने शरीर में फर्क महसूस करना शुरू किया तो उन्हें यकीन हुआ कि आयुर्वेद स्वस्थ व रोग मुक्त जीवन का एक संपूर्ण समाधान है। तब गुरु मनीष ने आयुर्वेद को भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में सबसे आगे लाने का फैसला किया।

गुरु मनीष कहते हैं, 'आयुर्वेद बिना किसी दुष्प्रभाव के बीमारियों के मूल कारण पर काम करता है। इसके अलावा, हर्बल उत्पाद विषाक्त पदार्थों से शरीर को छुटकारा दिलाते हैं और इसे ठीक करने में मदद करते हैं। यह प्रक्रिया शरीर को किसी भी बीमारी से लड़ने में मदद करती है। '

गुरु मनीष ने 1997 में आयुर्वेद के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य की अवधारणा का प्रचार करना शुरू किया और बड़े प्रयासों के बाद 2019 में चंडीगढ़ के निकट ज़ीरकपुर में एक आयुर्वेदिक क्लीनिक एवं अनुसंधान केंद्र 'शुद्धि आयुर्वेद ' की स्थापना की। शुद्धि आयुर्वेद तथा गुरु मनीष के नेतृत्व में भरोसेमंद सदियों पुराने आयुर्वेद के ज्ञान और उपचार, जो शरीर को आंतरिक रूप से पोषण देता है, का उपयोग विभिन्न रोगों से पीड़ित व्यक्तियों के इलाज के लिए किया जाता है।

गुरु मनीष केवल 46 वर्ष के हैं और भारत सरकार के 'वोकल फॉर लोकल ' अभियान के तहत आयुर्वेद को बढ़ावा देने का उनका बहुत स्पष्ट विजन है। आयुर्वेद में दुनिया भर में बिगड़ते स्वास्थ्य हालात को उलटने की बहुत बड़ी क्षमता है। बिना रोग वाले व्यक्ति को किसी उपचार की आवश्यकता नहीं है, लेकिन अपने शरीर को रोग से बचाने के लिए सभी को स्वयं को तैयार रखना चाहिए। हालांकि, यदि रोग होता है, तो रोग के लक्षणों के उपचार और रोग के कारण को समाप्त करने के लिए एक आक्रामक रणनीति का उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद रक्षात्मक व आक्रामक रणनीति दोनों प्रदान करता है, जबकि एलोपैथी की भूमिका आक्रात्मक रणनीति तक ही सीमित होती है।

गुरु मनीष का मंत्र है कि आयुर्वेद और स्वस्थ रहन-सहन की आदतों का उपयोग बीमारी को होने से रोकने के लिए होना चाहिए, न कि उसके इलाज के लिए। वह एक ऐसा जीवन जीने पर जोर देते हैं जो आयुर्वेद के उपयोग के इर्द-गिर्द घूमता है, स्वस्थ जीवन शैली अपनाता है, संतुलित आहार लेता है और योग व ध्यान का अभ्यास करता है। आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए अथक परिश्रम और अटूट जुनून के साथ, गुरु मनीष आयुर्वेद को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

आज शुद्धि आयुर्वेद के तहत पूरे भारत में 160 से अधिक आयुर्वेदिक केंद्र संचालित हैं। इसके अलावा, उन्होंने आयुर्वेद के माध्यम से 'स्वास्थ्य का अधिकार ' नामक एक पहल भी शुरू की है और चंडीगढ़ के पास डेराबस्सी में भारत का पहला एकीकृत चिकित्सा विज्ञान अस्पताल - राजीव दीक्षित मेमोरियल अस्पताल एवं एकीकृत चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एच आई आई एम एस) की स्थापना की है।

गुरु मनीष ने कहा, 'इंटीग्रेटेड मेडिसिन साइंसेज हॉस्पिटल विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के विवेकपूर्ण मिश्रण का उपयोग करते हुए रोगियों को ठीक करेगा। एचआईआईएमएस विभिन्न चिकित्सा विज्ञानों की उपयोगिता और उपचार क्षमता को एक छत के नीचे लेकर आया है। इसके पीछे विचार यह है कि मानव शरीर की किसी भी बीमारी का इलाज करने के लिए विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों की सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाये। अस्पताल आयुर्वेद, एलोपैथी, मधुमेह नियंत्रण, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा, होम्योपैथी आदि की सुविधाएं प्रदान करेगा। इनका प्रबंधन उन विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा जो अपने चुने हुए क्षेत्रों में शीर्ष विशेषज्ञ हैं। '



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