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SPECIAL REPORT : कैसे तय होगा कि किसको कौन सी कोरोना वैक्सीन की डोज दी जाए?

नई दिल्ली. भारत में कोविशील्ड व कोवैक्सीन (COVISHIELD AND COVAXIN) के बाद तीसरी वैक्सीन (SPUTNIK-V) को मंजूरी की उम्मीद है। इसके साथ ही अब सवाल उठने लगा है कि किसको, कौन सी वैक्सीन की डोज दी जाएगी। स्पूतनिक-5 वैक्सीन दुनिया की तीसरी सबसे अधिक 91.6 फीसदी प्रभावी वैक्सीन है। कोविशील्ड करीब 62 फीसदी तो कोवैक्सीन का अभी कोई डाटा जारी नहीं किया गया है।
इटली में अफवाह बुजुर्गों के लिए वैक्सीन
इटली में अफवाह फैली कि एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन युवाओं, सैनिकों, शिक्षकों व सुरक्षा से जुड़े लोगों के लिए होगी। फाइजर व मॉडर्ना की एमआरएनए वैक्सीन की 90 फीसदी से ज्यादा प्रभावी होने के कारण इसे सबसे महत्त्वपूर्ण लोगों, बुजुर्गों आदि को लगेगी।

सवाल, बुजुर्गों पर 8 फीसदी प्रभावी
ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को लेकर जर्मनी फ्रांस व स्वीडन में 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को अनुमति नहीं दी गई है। जर्मनी सरकार का कहना है कि ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन 65 साल से अधिक उम्र के लोगों के बीच सिर्फ 8 फीसदी प्रभावी है।

पर भारत में उम्र सीमा तय नहीं
भारत में भी ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन लगाई जा रही है। यहां सीरम इंस्टीट्यूट कोविशील्ड नाम दिया है। हालांकि यहां पर अभी वैक्सीन लगवाने वाले लोगों के लिए अधिकतम उम्र सीमा तय नहीं की गई है।

कम उम्र व बुजुर्गों को अनुमति नहीं
यूरोपीय संघ ने एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन को लेकर जर्मनी, इटली, फ्रांस, बेल्जियम, लिथुआनिया, पोलैंड, ऑस्ट्रिया व स्वीडन में इसे 18-55 साल की उम्र के लोगों को ही लगाने की अनुमति दी है। हवाला दिया है कि यह वैक्सीन परीक्षण में यह उम्र के लोगों पर कम प्रभावी थी। साथ ही कहा है कि कम उम्र के लोगों के लिए नया टीका उपलब्ध कराएंगे।

प्रभाव का उम्रवार डाटा जरूरी
वैक्सीन को मंजूरी देने वाले दुनिया के कई नियामकों ने सुझाव दिया है कि जब तक वैक्सीन के प्रभाव के लिए उसके परीक्षण में उम्रवार डाटा न आ जाए तब तक बच्चों व बुजुर्गों को नहीं लगाना चाहिए।
तर्क यह भी
एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के दौरान उसकी दोनों खुराक की प्रभावकारिता 62 फीसदी थी, लेकिन वॉलंटियर्स को गंभीर बीमारी या मौतों से बचाने में सफल रही।

बच्चों के लिए कोई वैक्सीन क्यों नहीं
देश में दो वैक्सीन कोविशील्ड व कोवैक्सीन का टीकाकरण किया जा रहा है। अभी बच्चों के लिए कोई टीका नहीं लग रहा है। 5-10 साल के बच्चों पर कोई परीक्षण का डाटा नहीं है। पूरी दुनिया में चरणबद्ध तरीके से स्कूल खुल रहे हैं। सवाल है कि बच्चों के लिए क्या कोई वैक्सीन कारगर नहीं है तो बच्चे स्कूल जाने पर सबसे ज्यादा संक्रमण के वाहक होंगे।



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