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डिप्रेशन से बचना है तो जीवन शैली और आहार में करें यह परिवर्तन.....

बदलती जीवन शैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा ओर विभिन्न कारणों से लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। डिप्रेशन के कारण व्यक्ति अपने आप को अकेला और कमजोर महसूस करता है। डिप्रेशन से व्यक्ति का वजन बढ़ना, दिमाग में गलत विचार आना और वह कई बीमारियों से घिर जाता है। क्योंकि डिप्रेशन से व्यक्ति के शरीर में कई प्रकार के हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। जिससे भूख अधिक लगना या बिल्कुल नहीं लगना, पाचन तंत्र खराब होना आदि समस्या आती है। लेकिन इससे बचने के कई आसान उपाय हैं। जिसकी सहायता से व्यक्ति डिप्रेशन से बाहर आ सकता है।

डिप्रेशन के लक्षण.....

-आत्मविश्वास में कमी आना।

- ध्यान केंद्रित नहीं रहना।

-हमेशा उदास रहना।

-अपने आपको थका और हारा हुआ महसूस करना।

- अपने आपको भीड़ और परिवार से दूर रखना।

-अकेले रहना पसंद करना।

-चिड़चिड़ा होना।

आपको बता दें कि थोड़ा बहुत तनाव या स्ट्रेस होना जीवन का एक हिस्सा हो चुका है। लेकिन जब यह तनाव अधिक और अनियंत्रित हो जाता है। तो यह हमारे मस्तिष्क और शरीर पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। यह कब डिप्रेशन में बदल जाता है। व्यक्ति को पता ही नहीं चलता है। डिप्रेशन उस व्यक्ति को होता है जो हमेशा तनाव में रहता है। अगर व्यक्ति लंबे समय तक इन परिस्थितियों में रहता है। तो वह धीरे-धीरे तनाव ग्रस्त जीवन जीने की पद्धति का भी आदि हो जाता है। तब यदि उसे तनावग्रस्त स्थिति ना मिले तो वह इस बात से भी तनाव महसूस करने लगता है। जिस से बचने के कई उपाय हैं।

डिप्रेशन से बचने के उपाय

आहार में परिवर्तन-

डिप्रेशन के रोगी को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, पानी युक्त फल और सब्जियों का अधिक सेवन करना चाहिए।

ऐसा पौष्टिक भोजन करना चाहिए, जिसमें शरीर के लिए जरूरी विटामिंस और खनिज हो।

हरी पत्तेदार सब्जियों और मौसमी फलों का सेवन जरूर करना चाहिए।

चुकंदर का सेवन करें, इसमें उचित मात्रा में पोषक तत्व होते हैं। विटामिंस, फोलेट, यूराडाइन, मैग्निशियम आदि हमारे मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर्स की तरह काम करते हैं। जो कि अवसाद के रोगी में मुड को बदलने का कार्य करते हैं।

भोजन में ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करें। इसमें उचित मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और मोनोसैचुरेटेड फैटी एसिड पाए जाते हैं। यह ह्रदय रोग तथा अवसाद को दूर करने में काफी मददगार रहते हैं।

डिप्रेशन के रोगी में अस्वस्थ भोजन एवं अधिक भोजन करने की प्रवृत्ति होती है। अवसाद के रोगी को जितना हो सके जंक फूड और बासी भोजन से दूर रखना चाहिए। इसके बजाय घर पर बना पोषक तत्वों से भरपूर सात्विक भोजन देना चाहिए।

भोजन में सलाद के रूप में टमाटर का सेवन करें। टमाटर में लाइकोपीन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। जो अवसाद से लड़ने में मदद करता है। एक शोध के अनुसार जो लोग सप्ताह में 4 से 6 बार टमाटर खाते हैं। वह सामान्य की तुलना में कम अवसाद ग्रस्त होते हैं।

मांसाहार और बासी भोजन नहीं करें। धूम्रपान, मघसेवन से बचें। किसी भी प्रकार के नशे का त्याग करें।

अवसाद से ग्रस्त रोगी को परिवार और दोस्तों के साथ अधिक समय बिताना चाहिए। अपने दोस्तों से मन की बातें करना चाहिए। अवसाद से निकलने के लिए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में व्यायाम, योग एवं ध्यान को जगह देनी चाहिए। मस्तिष्क को शांत रखना चाहिए। तथा मेडिटेशन करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना या किसी खास कारण से डिप्रेशन का शिकार हुआ है। तो उसे ऐसे कारण और जगह से दूर रहना चाहिए। मधुर संगीत एवं सकारात्मक विचारों से युक्त किताबें पढ़ना चाहिए, स्वयं को सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रखना चाहिए और अकेले रहने की आदत से बचना चाहिए।



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