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रोगों को दूर रखना है, तो करें ये काम

एक्यूप्रेशर सिद्धांत (Acupressure theory) के अनुसार हमारे हाथों मेें पूरे शरीर के प्रत्येक अंग व प्रत्यांग के दबाव बिंदु होते हैं, जिनको दबाने पर सम्बंधित अंग तक खून व ऑक्सीजन (oxygen) का प्रवाह पहुंचने लगता है और धीरे-धीरे वह रोग ठीक होने लगता है। इन सभी दबाव बिंदुओं को दबाने का सबसे सरल तरीका ताली (Clap) है।

अंगुली ताली
इस ताली में बाएं हाथ की हथेली पर दाएं हाथ की चारों अंगुलियों को एक साथ तेज दबाव के साथ इस प्रकार मारा जाता है कि दबाव पूरा हो और आवाज अच्छी आए। इस प्रकार की ताली से बाएं हथेली के फेंफड़े, यकृत, पिताशय, गुर्दे छोटी आंत व बड़ी आंत तथा दाएं हाथ की अंगुली के साइनस के दबाव बिंदु दबते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप इन अंगों तक खून का प्रवाह तीव्र होने लगता है। ताली को जब तक बजाया जाए तब तक कि हथेली लाल न हो जाए। इस प्रकार की ताली कब्ज, एसिडिटी, मूत्र, संक्रमण खून की कमी व श्वास लेने में तकलीफ जैसे रोगों में लाभ पहुंचाती है।

थप्पी ताली
इस प्रकार की ताली में दोनों हाथों के अंगूठा-अंगूठे से कनिष्का-कनिष्का से तर्जनी-तर्जनी से यानि की सभी अंगुलियां अपने समानांतर दूसरे हाथ की अंगुलियों पर पड़ती हो, हथेली-हथेली पर पड़ती हो। इस प्रकार की ताली से आवाज बहुत तेज व दूर तक फेंकी जा सकती है। इस प्रकार की ताली कान, आंख, कंधे, मस्तिष्क, मेरूदंड के सभी बिंदुुओं पर दबाव डालती है। इस ताली का सर्वाधिक लाभ फोल्डर एंड सोल्जर, डिप्रेशन, अनिद्रा, स्लिप डिस्क, स्पोगोलाइसिस, आंखों की कमजोरी में पहुंचता है। इस ताली को भी जब तक बजाया जाए तब तक कि हथेली लाल न हो जाए।

ग्रिप ताली
इस ताली में सिर्फ हथेली को हथेली पर ही इस प्रकार मारा जाता है कि वह क्रॉस का रूप धारण कर ले। इस ताली से कोई विशेष रोग में लाभ तो नहीं मिलता है, लेकिन यह ताली उत्तेजना का कार्य करती है। इस ताली से अन्य अंगों के दबाव बिंदु सक्रिय हो उठते हैं। यह ताली सम्पूर्ण शरीर को सक्रिय करने में मदद करती है। यदि इस ताली को तेज व लम्बा बजाया जाता है तो शरीर में पसीना आने लगता है जिससे कि शरीर के विषैले तत्व पसीने से बाहर आकर त्वचा को स्वस्थ रखते हैं।



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