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शरीर में जमा दूषित तत्वों को बाहर निकाल बीमारियां दूर करती प्राकृतिक चिकित्सा

प्राकृतिक चिकित्सा हमारी प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। इसके अनुसार शरीर का निर्माण पंच महाभूत से बना है। इससे के कम या ज्यादा होने से बीमारियां होती हैं और इलाज भी इन्हीं से होता है। नवंबर माह में नेचुरोपैथी दिवस मनाते हैं।
पंच महाभूत का सिद्धांत
क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा, पंच तत्त्व मिल बना शरीरा। यह कहावत न केवल शरीर की बनावट बल्कि बीमारियों के इलाज के लिए भी सटीक है। क्षिति- पृथ्वी (मिट्टी), जल-पानी, पावक-अग्नि (पाचक अग्नि), गगन- आकाश (खाली जगह) और समीरा-वायु (हवा) है। इसको पंच महाभूत कहते हैं। इन पांच महाभूत की कमी या अधिकता से ही बीमारियां होती हैं। इनसे ही इलाज किया जाता है।
शरीर को शुद्ध करती मिट्टी
शरीर के दूषित तत्त्वों को मिट्टी बाहर निकालती है। इसका लेप लगाने से कब्ज, पेट, त्वचा रोगों से बचाव होता है। हाई बीपी और सिर दर्द होने पर माथे या सिर पर मिट्टी का लेप लगाते हैं। त्वचा रोगों में मिट्टी का लेप लगाकर धूप में बैठते हैं। मानसिक समस्याओं में भी मिट्टी का लेप नियमित माथे पर लगाने से तनाव, अनिद्रा, थकान और चिड़चिड़ापन आदि में आराम मिलता है।
सूर्य स्नान के लाभ
देश की करीब 80त्न आबादी में विटामिन डी की कमी है। इससे कम उम्र में हड्डियां कमजोर होती है। अगर रोज 45 मिनट धूप में बैठें तो इससे बच सकते हैं। महिलाओं की अधिकतर बीमारियों का कारण भी धूप की कमी है। डायबिटीज और हृदय रोगों से बचाव के लिए भी नियमित धूप में बैठना चाहिए।
अंकुरित काला तिल है दवा
सर्दी में काले तिल को अंकुरित लेना दवा की तरह काम करता है। यह न केवल मौसमी समस्याओं से बचाता है, बल्कि थायरॉइड, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हड्डी रोगों में भी लाभ देता है। खून की कमी, गठिया, ब्लड प्रेशर, हृदय रोगों और शरीर में सूजन है तो भी आराम मिलता है।
बालों के लिए प्याज लगाएं
अगर बाल झड़ रहे हैं या सफेद हो रहे हैं तो प्याज की लुगदी बना लें। इसमें नींबू का रस और सरसों का तेल मिलाकर करीब 20-25 मिनट तक रात में मसाज करें। सुबह मुल्तानी मिट्टी या रीठा से धो लें। विशेषज्ञ की सलाह से ही इसका प्रयोग करें। सर्दी में आंवला, अमरूद और गाजर का प्रयोग भी अधिक करें।



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