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कोरोना ही नहीं, इन बीमारियों में भी घटती है सूंघने की क्षमता

कोरोना के चलते आजकल सूंघने की क्षमता कम हो रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कोरोना के अलावा दूसरी बीमारियां भी हैं, जिसमें सूंघने की क्षमता प्रभावित होती है। यदि लंबे समय तक गंध नहीं आ रही तो इसके पीछे न्यूरोडिजनरेटिव डिजीज जैसे डिमेंशिया, अल्जाइमर्स आदि के लक्षण हो सकते हैं।
डिमेंशिया का संकेत
गंध का अहसास नहीं होने के पीछे सर्दी-जुकाम, वायरल इन्फेक्शन, रायनाइटिस, कुछ दवाइयों का दुष्प्रभाव आदि कारण हो सकते हैं। कई बार ब्रेन ट्यूमर की वजह से भी सूंघने की शक्ति कमजोर होने लगती है। यदि लंबे समय तक गंध का अहसास नहीं हो रहा है तो यह डिमेंशिया का शुरुआती लक्षण हो सकता है। न्यूरोडिजनरेटिव डिजीज अल्जाइमर्स और पार्किंसंस में भी गंध जा सकती है।
उम्र बढऩे पर जोखिम
उम्र बढऩे पर इंद्रियों की शक्ति कमजोर होने के कारण सूंघने की क्षमता कमजोर हो सकती है। जुकाम-खांसी और कफ के कारण एनोस्मिया हो सकता है। इससे सूंघने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
आधा चम्मच मुलैठी पाउडर देगा मजबूती
सूंघने की क्षमता के नुकसान को रोकने के लिए जरूरी है कि न्यूरोडिजनरेटिव रोगों की आशंका कम की जाए। इसके लिए सबसे बेहतर होगा कि शुरुआत से ही स्वस्थ दिनचर्या और पौष्टिक आहार का प्रयोग किया जाए। साथ ही विशेषज्ञ की सलाह से शंखपुष्पी, गिलोय, अश्वगंधा, ब्राह्मी, वच, जटामांसी, ब्राह्मी वटी आदि का प्रयोग कर सकते हैं। नियमित दूध या पानी के साथ आधा चम्मच मुलैठी लें। गिलोय का रस भी मानसिक स्वास्थ्य में लाभ देगा।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए रोज खाएं भीगे बादाम और अखरोट
नियमित सात-आठ बादाम और तीन-चार अखरोट को भिगोकर प्रयोग करें। इससे याद्दाश्त और अन्य तरह की मानसिक समस्याओं की आशंका को कम किया जा सकता है। इसके अलावा देसी घी की एक बूंद नाक में डाल सकते हैं। देसी घी का नियमित प्रयोग भी मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। ब्रह्म रसायन जैसे च्यवनप्राश आदि का प्रयोग करें। नियमित आहार में आंवला और हरड़ का प्रयोग भी न्यूरोडिजनरेटिव रोगों की आशंका कम करेगा।
दिमागी सक्रियता के लिए जरूरी है नियमित व्यायाम
उम्र के साथ होने वाली मानसिक समस्याएं कहीं न कहीं सूंघने की क्षमता को भी प्रभावित करती हैंं। इनकी आशंका को कम करने के लिए जरूरी है कि नियमित कुछ ऐसे व्यायाम किए जाएं, जो दिमागी सक्रियता को बढ़ाते हों। इसमें पढऩा, पहेलियों को हल करना, याद्दाश्त वाले खेल खेलना आदि एक्टिविटीज को शामिल किया जा सकता है।



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