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रिसर्च स्टडी: इटली के वैज्ञानिकों का दावा, जागते हुए हम जो अनुभव करते हैं सपनों में भी वे घटनाएं जारी रहती हैं

हमें सपने क्यों आते हैं? क्या सपनों का हमारे असल जीवन से कोई लेना-देना है या ये बस हमारे दिमाग में उमडऩे वाले खयालों की अभिव्यक्ति मात्र हैं? ऐसे ढेरों सवाल हैं जो हम अक्सर खुद से पूछते हैं लेकिन जवाब शायद कभी नहीं मिल पाते। लेकिन अब इटली रोमा ट्रे विश्वविद्यालय के शोधकर्ता और कंप्यूटर वैज्ञानिक एलेसेंड्रो फोगली और उनके सहयोगियों ने बड़े पैमाने पर सपनों पर किए एक शोध (Meta Study on Dreams) के बाद यह दावा किया है कि सपने हमारी रोजमर्रा की वास्तविकता की लगातार चलने वाली किसी फिल्म की तरह है जो हर दिन नए एपिसोड (सपना) दिखाता है।

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दिन की घटनाएं सपने में भी जारी रहती हैं
शोध के निष्कर्ष के आधार पर शोधकर्ताओं का मानना है सपने दरअसल हमारी प्रतिदिन की घटनाओं का निरंतर प्रस्तुतिकरण है। वैज्ञानिकों ने अपनी इस परिकल्पना में मनोरोगियों और अनिद्रा की कमी या नींद न आने (Sleep Apnea Disorder) के कारणों का अध्ययन किया है। शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन परेशानियों और मुश्किलों का सामना ये दिन में करते हैं वही रात को उनके सपनों में भी दिखाई देती हैं। यानी जागते समय ये रोगी जिन समस्याओं का सामना कर रहे थे वे रात को भी उन्हें तंग कर रहे थे। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में ऐसे 24हजार से ज्यादा रोगियों की नींद के पैटर्न (Sleep Pattern) और सपनों का अध्ययन किया है।

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रोज के अनुभव और सपनों के बीच की कड़ी ढूंढ रहे
प्रचीन सभ्यताओं (Ancient Civilizations) का मानना था कि सपने आने का कारण आध्यात्मिक और अलौकिक (Spiritual or Supernatural Source) स्रोत से जुड़ा हुआ है। हम में से अधिकतर लोग अपने जीवन में कभी न कभी इस पर विचारकरचुके होंगे कि सपने कहां से आते हैं और इनके आने का क्या उद्देश्य हो सकता है? लेकिन पूर्व के कुछ शोध और हाल ही किए गए इस नए शोध में वैज्ञानिकों को पूरा यकीन है कि सपने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में घटने वाली घटनाओं से ही जुड़ी हुई होती हैं जो सपनों के रूप में सोते समय भी निरंतर जारी रहती हैं। अध्ययन के निष्कर्ष जानने के बाद अब वैज्ञानिक किसी व्यक्ति के जीवन में जागते समय रोज घटने वाली घटनाओं और गतिविधियों के अनुभव के साथ सपनों में दिखाई देने वाली घटनाओं और उनके क्रम को जोडऩे वाली कड़ी की तलाश कर रहे हैं।

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समाधान खोजने की क्षमता पर भी डालते असर
एलेसेंड्रो फोगली का कहना है कि रात को देखे गए हमारे अधिकांश सपने दरअसल रोजमर्रा की जिंदगी में हमारे साथ क्या हो रहा है उसी की निरंतरता है। सपने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से प्रभावित होते हैं जैसे अवसाद (Depression), चिंता (Anxiety), संघर्ष (Struggle), सुख-दुख (Up and Downs), मिलना-बिछुडऩा (Seperation and Re-union)आदि। नकारात्मक और दुखी करने वाली घटनाएं हमारे सपनों पर भी प्रतिकूल प्रभाव (Negative Effect) डालती हैं। इतना ही नहीं, लगातार ऐसे सपने देखने से वे व्यक्ति की समाधान खोजने (Problem Solving) की क्षमता को भी प्रभापित करने लगते हैं।

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नए टूल से जानी सपनों की हकीकत
एलेसेंड्रो और साथी शोधकर्ताओं ने सपनों का विश्लेषण करने के लिए एक नया उपकरण बनाया। इस नई तकनीक का इस्तेमाल व्यापक स्तर पर लोगों की नींद की मस्तिष्क की गतिविधियों और जीवन में होने वाले अच्छे-बुरे अनुभवों के समय दिमाग में होनेवाले बदलाव या हलचल का निरीक्षण करने के लिए किया गया था। इस खास उपकरण की मदद से उन्होंने इटली में संकलित सपनों के बारे में विस्तृत जानकारी देने वाले एक सार्वजनिक डेटाबेस 'ड्रीमबैंक' (Dream Bank) के हजारों सपनों और उनकी प्रकृति का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह उपकरण स्वचालित रूप से इन सपनों काविश्लेषण कर सकता है। ड्रीम प्रोसेसिंग टूल सपने की रिपोर्ट का अध्ययन कर उसे समझने में मदद करता है।

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उपकरण सपनों के बारे में दी गई केवल सामाजिक वार्तालाप (\Social Interactions), व्यक्त की भावनाओं (Expressed Emotions), बोले गए शब्दों (Exchange of Words) और दिनभर में मिले लोगों (People We Meet) और सपने में दिखाई देने वाले पात्रों (Characters We Met in Our Dreams) पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। दरअसल, किसी व्यक्ति के सपनों का विश्लेषण करने के लिए ये तीन आयाम ही सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं क्योंकि यह सपनों की व्याख्या करने में सहायक हैं। यह उपकरण दिनभर की दिनचर्या, मिलने वाले लोगों और व्यक्त की भावनाओं के आधार पर किसी व्यक्ति द्वारा देखे गए सपने की उत्पत्ति के source और सपनों में दिखने वाली घटनाओं के पीछे की पृष्ठभूमि को भी परिभाषित कर सकता है।

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