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CORONA SIDE EFFECT : कोरोना से ठीक होने वाले रोगियों में सामने आती हैं ये परेशानियां

जयपुर. कोरोना दिनों दिन बढ़ता जा रहा है और वैक्सीन पर काम चल रहा है। हालांकि रूस ने टीका तैयार कर लिया है, लेकिन इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई देशों ने आपत्ति जताई है कि इसे निर्धारित प्रक्रिया से तैयार नहीं किया गया। इस बीच एक बुरी खबर है कि हाल 100 मरीजों पर किए शोध में सामने आया है कि कोविड-19 के रोगी ठीक होने के बाद कुछ समस्याओं से घिर जाते हैं। ये शोध जनर्ल ऑफ मेडिकल वायरोलॉजी में प्रकाशित हुआ है।

थकावट
बीमारी से ठीक होने के बाद पहले जैसी ताकत पाने में कुछ समय लगता है, लेकिन कोरोना वायरस में देखा जा रहा है कि मरीजो को ठीक होने के कई हफ्तों, यहां महीनों बाद भी थकावट और कमजोरी महसूस होती है, जो एक चिंता का विषय बन गया है। न सिर्फ कोरोना से जुड़ी थकावट पर विशेषज्ञों ने काफी चर्चा की है, बल्कि अध्ययन में शामिल लगभग 60त्न रोगियों ने माना की ठीक होने के हफ्तों बाद भी उन्हें थकान, सुस्ती और कमज़ोरी महसूस हो रही थी। इसके अलावा, असंतुलित ऊर्जा के स्तर की वजह से भी रोगी मांसपेशियों में दर्द, सुइयों के चुभने जैसे दर्द जैसे लक्षणों को अनुभव कर सकते हैं।

सांस लेने में तकलीफ
सांस लेने में तकलीफ और छाती में मरोड़ जैसा दर्द, कुछ ऐसे प्राथमिक लक्षण हो सकते हैं जो यह बता सकते हैं कि आपका संक्रमण कितना बुरा है। हालांकि, कुछ मरीज ऐसे भी हैं, जो संक्रमण से ठीक हो गए हैं, लेकिन सांस की तकलीफ लंबे समय तक रहती है।

याददाश्त का कम होना
शोध में शामिल रोगियों में से एक-चौथाई लोग, जिनके कोविड-19 के लक्षण मध्यम या गंभीर थे, उन्होंने माना कि बीमारी से ठीक के बाद उन्होंने न्यूरोसाइकोलॉजिकल संबंधित लक्षण महसूस किए। रिकवरी सेंटर के अंदर और बाहर चल रही चीज़ें, रोगियों में मानसिक परेशानी, याददाश्त या व्यवहार से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकती हैं।

तनाव और बेचैनी
कोरोना वायरस महामारी के बाद लॉकडाउन ने हम सभी के ज़िंदगी में तनाव और बेचैनी को बढ़ा दिया है। जो लोग कोरोना से संक्रमित होकर ठीक हुए उनके लिए ऐसी स्थिति को झेलना और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसा देखा जा रहा है कि बेचैनी और तनाव लंबे समय तक उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है।



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