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अगर आप भी संजय दत्त की तरह शमिल हैं इन पांच लोगों में तो आपको भी हो सकता है लंग कैंसर

भारत में कैंसर (India Cancer Scenario) के मरीजों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। यहां हर आयु और आय वर्ग के लोगों में कैंसर के अलग-अलग स्वरूपों का प्रकोप देखने को मिल रहा है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च या ICMR) के अनुसार, 2012 से 2014 के बीच सालाना करीब 1300 लोगों की देश में किसी न किसी प्रकार के कैंसर के कारण मौत हुई है। वहीं 2012 में प्रतिमाह कैंसर से होने वाली मौतों (Death Rate) में अचानक 6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान दर्ज कैंसर के कुल 2,934,314 मामलों में से 478,180 लोगों की मौत हो गई। दरअसल हमारी वर्तमान जीवनशैली (Cancer Due To Life Style), खान-पान और प्रदूषण (Pollution) के बढ़ते स्तर के कारण कैंसर तेजी से भारत में अपने पांव पसार रहा है। एक कारण समुचित व्यायाम (Lack of Exsercise) न करना भी है। समय रहते कैंसर के इलाज के लिए कैंसर की जांच या स्क्रीनिंग्र (Cancer Screening) का होना बहुत जरूरी होता है। मंगलवार को बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त (Sanjay Dutt] Bollywood Actor Detects Lungs Cancer) को भी लंग का कैंसर डिटेक्ट हुआ है। सर्वविदित है की संजय दत्त जवानी से ही ड्रग्स, धूम्रपान और शराब के आदि उनकेकरीर और स्वास्थय दोनों पर पड़ा है।वे जल्द ही विदेश इलाज के लिए रवाना होंगे। आइए जानते हैं कि लंग्स कैंसर होने का खतरा किन लोगों में सबसे अधिक होता है और किन लोगों को इसकी स्क्रीनिंग की जरूरत पड़ सकती है।

अगर आप भी शमिल हैं इन पांच लोगों में तो आपको भी हो सकता है लंग कैंसर

क्या होती है कैंसर की स्क्रीनिंग
दरअसल, किसी भी बीमारी के बारे में निश्चित तौर पर तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता जब तक कि उसके लक्षण पूरी तरह उभर नहीं आते। अगर लक्षण बीमारी के बाद भी नजर नहीं आते हें तो चिकित्सक उनकी जांच करते हैं। इसी प्रक्रिया को स्क्रीनिंग करना कहते हैं। स्क्रीनिंग गंभीर बीमारियों की रोकथाम के लिए सबसे अहम कदम है। स्क्रीनिंग से समय रहते किसी भी प्रकार के कैंसर की पहचान की जा सकती है जो अंतत: इलाज में important भूमिका निभाती है और रोगी को बचाना आसान हो जाता है।

अगर आप भी शमिल हैं इन पांच लोगों में तो आपको भी हो सकता है लंग कैंसर

किन्हें लंग्स कैंसर का खतरा अधिक
01. धूम्रपान करने वाले (Smoking)
अधिक धूम्रपान करने वाले लोगों को लंग्स कैंसर होने का खतरा भी अधिक होता है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप कितने सालों से और किस सीमा तक धूम्रपान करते आ रहे हैं। किसी भी उम्र में धूम्रपान छोडऩे से लंग्स कैंसर होने का खतरा काफीहद तक कम हो सकता है।
02. अप्रत्यक्ष धूम्रपान करने वालों पर असर (Passive Smoking)
पैसिव स्मोकिंग या अप्रत्यक्ष रूप से धूम्रपान से तात्पर्य ऐसे लोगोंसे है जो सीधे खुद से धूम्रपान नहीं करते लेकिन उनके आस-पास ऐसे लोग होते हें जो बहुत ज्यादा स्मोकिंग करते हैं और वे धुंए के संपर्क में बराबर बने रहते हैं। इससे धुंआ सांस के जरिए उनके फेफड़ों तक भी पहुंच जाता है। ऐसे लोगों को भी लंग्स कैंसर होने का खतरा होता है। अधिक प्रदूषण के बीच रहने वाले लोगों को भी यह बीमारी हो सकती है। इसे सेकंड हेंड स्मोकिंग भी कहते हैं।

03. रेडियॉन गैस के संपर्क में रहने पर (Harmful Gases)
जमीन में मौजूद पानी, यूरेनियम और चट्टानों के टूटने से रेडियॉन गैस निकलती है। यह घातक गैस हवा में घुलकर सांस लेने की प्रणाली को प्रभावित करता है। यह गैस शरीर के अन्य अंगों पर भी बुरा असर डालती है। इससे भी लंग कैंसर होने का खतरा होता है। घर में रेडिशॅन का लेवल जांचने के लिए बाजार में उपकरण मौजूद हैं। अगर जांच उपकरण में रेडियॉन गैस की अधिक मौजूदगी मिले तो तुरंत लंग्स की स्क्रीनिंग करवाएं।

04. आर्सेनिक जैसे रसायनों के संपर्क में आने पर
अगर आप घर या ऑफिस में लगातार अजबेस्टो या इसके जैसे ही अन्य खतरनाक रसायनों के संपर्क में रहते हैं तो आपको फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा अधिक होता है। क्रोमियम, ऑर्सेनिक और निकल जैसे रासायनिक पदार्थों के अधिक संपर्क में आने से फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा कईगुना बढ जा़ता है। ऐसे में धूम्रपान की लत आग में घी का काम करती है।

05. अनुवांशिक कारण भी होते हैं जिम्मेदार
अधिकतर मामालोंमें अनुवांशिक कारण भी केंसर के पीढ़ी दर पीढ़ी मौजूद रहने की एक बड़ी वजह है। अगर आपके परिवार में किसी भी व्यक्ति को कभी भी लंग कैंसर हुआ है तो आप भी एक बार अपनी जांच अवश्य करवा लें। अनुवांशिक कारणों से भी लंग कैंसर होने का खतरा रह़ता है।


डिसक्लेमर: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। राजस्थान पत्रिका इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।



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