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यदि आंखों से जुड़ी कोई समस्या है तो नजरअंदाज न करें

स्पष्ट दिखाई न देना रात के समय चीजें धुंधली दिखना, आंखों में खुजली की शिकायत, पानी आना, किसी वस्तु का दो-दो दिखाई देना रोशनी प्रभावित होने की ओर इशारा करते हैं। इनमें से आप कोई भी दिक्कत महसूस कर रहे हैं तो नेत्र रोग चिकित्सक की सलाह से आंखों की जांच कराएं। यह दिक्कत बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों किसी को भी हो सकती है।
विजन स्क्रीनिंग, आई टैस्ट-
यह दोनों ही आंखों की जांच का हिस्सा हैं। विजन स्क्रीनिंग में आंखों की दूर व पास की दृष्टि जांचते हैं। सामान्य व्यक्ति का विजन 6/6 (दूर) और एन-6 (पास) होता है। स्क्रीनिंग के बाद आई टैस्ट होता है। इसमें आंखों का प्रेशर, पुतली, लेंस की स्थिति और आंख के परदे (रेटीना) की जांच की जाती है। दोनों टैस्ट में से कौन-सी जांच जरूरी है यह मर्ज के आधार पर चिकित्सक तय करते हैं। दूर दृष्टि दोष (हायपरमेट्रोपिया) के लिए पॉजीटिव व निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) के लिए नेगेटिव चश्मे के नंबर का चयन किया जाता है।
डायबिटिक रहें अलर्ट-
मधुमेह के रोगियों में मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और रेटिना से जुड़ी दिक्कतों की होनी की आशंका रहती है। इन्हें ब्लड शुगर नियंत्रित करने व हर 6 से 8 महीने में आंखों की जांच कराने की सलाह दी जाती है।
कब कराएं टैस्ट-
आंखों की रोशनी से प्रभावित व्यक्ति को एक साल के अंतराल पर जांच करानी चाहिए। ऐसे व्यक्ति जिनके माता-पिता ग्लूकोमा से पीडि़त हैं उन्हें आंखों की तत्काल जांच करानी चाहिए ताकि इस रोग को होने से रोका जा सके।



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