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ये फूड और फ्रूट्स फेफड़ों के कैंसर से बचाने में सक्षम हैं

भारत के 20 से ज्यादा शहर दुनिया के 100 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में शीर्ष 50 में शामिल हैं। दिल्ली बीते कई सालों से सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। साल 2018 में प्रदूषित हवा के कारण दिल्ली में बने विदेशी दूतावासों के राजनायिकों ने वापस अपने देश की राह ले ली थी। जहरीली गैस के कारण दिल्ली, अलवर के भिवाड़ी, जोधपुर, आगरा, कानपुर जैसे शहरों में सांस लेना भी दूभर हो गया है। चिंताजनक बात यह भी है कि लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण हमारे फेफड़े छलनी होते जा रहे हैं। गंदगी, टार और बारीक धूलकणों का फेफड़ों में जमा होने से ये लगातार संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में धूम्रपान और शराब पीने से इन्हें और नुकसान पहुंच रहा है। यही वजह है कि आज की जीवनशैली और पर्यावरण में अपने फेफड़ों को स्वस्थ और क्रियाशील रख पाना एक बड़ी चुनौती है। अगर सही समय पर इन पर ध्यान नहीं दिया गया तो फेफड़ों का कैंसर भी हो सकता है। हाल ही बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त (Bollywood Actor Sanjay Dutt Detects Stage 4 Lungs Cancer) को भी फेफड़ों के कैंसर की चौथी स्टेज के बारे में पता चला है।

कोरोना वायरस से लडऩे में मददगार
कोरोना वायरस (COVID-19) सबसे पहले हमारे फेफड़ों पर हमला करता है। इसलिए फेफड़ों को स्वस्थ रखना जरूरी है। शोध में भी यह बात सामने आई है कि कोरोनावायरस से मरने वाले अधिकांश लोगों के फेफड़ों तेजी से नुकसान पहुंचता है। वायरस के अटैक करने पर हमारे फेफड़े सांस लेने में असुविधा महसूस करते हैं। बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखने को मिली है, क्योंकि उनके फेफड़े कमजोर होते हैं। ऐसे में लंग्स का सेहतमंद रखने के लिए आपको अपनी डायट में ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल करें जो फेफड़ों को मजबूत करें।

ग्रीनहाउस गैसें बनीं जानलेवा
हृदय, मस्तिष्क और किडनी की तरह फेफड़े भी हमारे शरीर के सबसे महत्त्वपूर्ण अंग हैं। हमारे पूरे शरीर और अंगों तक ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा पहुंचाने के लिए फेफड़े दिन-रात काम करते हैं तब भी जब हम सो रहे होते हैं। फेफड़े दरअसल हमारे शरीर के एक तरह से एअर फिल्टर की तरह काम करता है। यह हानिकारक पदार्थों को शरीर के भीतर जाने से रोकता है। लेकिन पर्यावरण में तेजी से बढ़ती ग्रीन हाउस गैसों और बारीक धूलकणों के कारण वायु प्रदूषण का स्तर लगातर बढ़ रहा है। जिसके चलते फेफड़ों को ज्यादा काम करना पड़ रहा है और वे लगातार संक्रमित हो रहे हैं। वर्तमान में पर्यावरण में अमोनिया, कार्बनडाईऑक्साइड, क्लोरीन और बारी डस्ट पार्टिकल्स (Greenhouse Gases) जैसे हानिकारक तत्त्व मौजूद हैं जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हालांकि अच्छे खान-पान और व्यायाम से शरीर को स्वस्थ और पर्यावरण जनित चुनौतियों का बेहतर सामना किया जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसे फल, हब्र्स और खाने केबारे में जिन्हें अपनी डाइट में शामिल कर हम अपने फेफड़ों को दमदार बना सकते हैं।

एक रिसर्च के अनुसार स्मोंकिंग छोडऩे के 15 साल बाद भी लंग्स कैंसर होने का खतरा रहता है। ऐसे में लंग्स कैंसर के खतरे से बचने के लिए कुछ हब्र्स को भी अपनी डायट में शामिल करें।
गिलोय
गिलोय अच्छा एंटीबायोटिक और एंटी-ऑक्सीडेंट हर्ब है, जो कैंसर की रोकथाम में भी सहायक है। प्रतिदिन इसका सेवन इम्यूनिटी को मजबूत करता है जिससे आपको कैंसर सैल्स से लडऩे में मदद मिलती है।
मुलेठी
गले में खराश या खांसी में ही नहीं, मुलैठी का सेवन हमें लंग कैंसर के खतरे से भी बचाता है। मुलेठी के प्रयोग से न सिर्फ गले बल्कि पेट और लंग कैंसर के खतरे को भी कम किया जा सकता है। प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मुलेठी का सेवन सेहत के लिए लाभकारी होता है।
तुलसी
तुलसी का आयुर्वेद में बहुत महत्त्व है। यह एक ऐसी औषधि है जो हर तरह के कैंसर से हमारा बचाव करती है। एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होने के कारण इसका सेवन कैंसर को रोकने में प्रभावी होता है। रोजाना तुलसी के 5 पत्तों का सेवन कैंसर से बचाता और साथ ही हमारी इम्यूनिटी भी स्ट्रॉग होती है।

लहसुन
लहसुन में फ्लेवोनॉयड्स जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो ग्लूटाथियोन के उत्पादन को उत्तेजित करता है। इसके साथ ये तत्व विषाक्त पदार्थों और कार्सिनोजेन्स के उन्मूलन को बढ़ाने में भी मदद करता है। जिसकी वजह से हमारे फेफड़े बेहतर तरीके से काम करते हैं। इसके अलावा लहसुन में एलिसिन यौगिक पाया जाता है। एलसिन यौगिक ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मददगार होता है। लहसुन के सेवन से ब्लड फ्लो भी बेहतर होता है। ऐसे कई गुणकारी तत्व मौजूद हैं जो हमें विभिन्न बीमारियों से दूर रखते हैं। रोजाना इसका सेवन करने से शरीर के अंदर उत्पन्न होने वाली कैंसर की कोशिकाएं खत्म हो जाती है और इससे फेफड़े भी स्वस्थ रहते हैं।
अदरक
अदरक इम्यूनिटी सिस्टम को बढ़ाने के साथ-साथ फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं को भी दूर करती है। इसमें ना सिर्फ एंटी-इंफ्लेेमेटरी प्रॉपर्टीज होती है, बल्कि यह हमारे शरीर को डिटॉक्सीफाई करने और फेफड़ों के प्रदूषित तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक है। इसके साथ ही अदरक फेफड़ों के परिसंचरण में भी सुधार करता है। इसके सेवन से फेफड़े स्वस्थ रहते हैं।

अलसी के बीज
एक रिसर्च के अनुसार, अलसी के बीज हमारे लंग टिश्यू को प्रोटेक्ट करते हैं। इसलिए फेफड़ों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए अलसी के बीजों का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही अलसी के बीज हमें थायराइड जैसी बीमारी के लिए भी रामबाण औषधी है।
ब्रोकली
ब्रोकली को एक सुपरफूड के रूप में जाना जाता है। दरअसल, ब्रोकली गोभी का ही एक स्वरूप है। इसमें विटामिन सी कंटेट, फोलेट, कैरोटीनॉयड और फाइटोकेमिकल्स जैसे तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व फेफड़ों में हानिकारक तत्वों से लडऩे में हमारी सहायता करता है। अगर आप चाहते हैं कि आपके फेफड़े हेल्दी रहे तो इसका सेवन जरूर करें। ब्रोकली हमारे लंग्स को मजबूत बनाती हैं। ब्रोकली में पाया जाने वाले विटामिन में विटामिन सी सबसे ज्यादा प्रभावशाली होता है। ब्रोकली में एंटी-ऑक्सीडेंट्स का गुण होता है जो लंग्स को कमजोर होने से बचाता है।

सेब
एक पुरानी कहावत है 'एपल अ डे, कीप्स द डॉक्टर अवेÓ यानी एक सेब रोज खाने से बीमारी पास नहीं फटकती। वैसे तो सेब स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर फल माना जाता है। सेब में विटामिन ए और सी पाया जाता है जो हैल्दी लंग्स के लिए आवययक है। सेब खाने से लंग्स को भरपूर ऊर्जा और सेहत मिलती है।
अनार
यह भी एक लाभदायक फल है। किसी भी बीमारी में सबसे ज्यादा खाया जानें वाला अगर कोई फल है तो वह अनार ही है। अनार में एंटी-ऑक्सीडेंट्स के साथ आयरन की मात्रा भरपूर होती है। यह पूरे शरीर के लिए फायदेमंद होता है। इसके रोजाना सेवन से लंग्स मजबूत बने रहते हैं और बीमारी का खतरा कम होता है।

बैरीज
फेफड़ों से संबंधित समस्या तब आती है जब उसमें टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। लेकिन अगर आप प्रतिदिन बैरीज का सेवन करते हैं तो यह लंग्स में टॉक्सिन्स को जमा होने से रोकते हैं। इनमें भरपूर एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो लंग्स को कमजोर होने से बचाते हैं।
अखरोट
अखरोट को गूदेदार नट्स में सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। यह सेक्स लाइफ के साथ मानसिक स्वास्थ्य में भी लाभकारी है। दरअसल, अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है जो शरीर को विभिन्न बीमारियों से बचाता है। यह लंग्स के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि यह एलडीएल को भी कंट्रोल करता है।

डिसक्लेमर: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। राजस्थान पत्रिका इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।



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