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लाइफ स्टाइल: जानिये स्ट्रैस हमारे चेहरे पर क्या और कैसे असर डालता है?

जीवन के किसी न किसी मोड़ पर हम में से हर कोई तनाव (Stress) महसूस करता है। लेकिन असल पुरानी तब शुरू होती है जब स्ट्रैस या तनाव का यह स्तर पुराना और गहरा (Chronic Stress) हो जाता है। ऐसा होने पर हमारे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर इसका गहरा असर पड़ता है। जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। 'स्ट्रैस ट्रस्टेड सोर्स' अवसाद के प्रभाव को बढ़ाकर मानसिक स्वास्थ्य के विकास से जुड़े जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इतना ही नहीं इससे आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली भी नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकती है और हृदय रोग के विकास के आपके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। लेकिन तनाव का सबसे ज्यादा असर होता है हमारे चेहरे पर। वहीं चेहरा जो हमारी वास्तविक पहचान है जो हमारे व्यक्तित्व का सबसे चमकदार हिस्सा है। तनाव केचलते हमारे चेहरे पर बिन बुलाए निशान, रूखी-सूखी त्वचा, झुर्रियां और मुंहासे पूरे चेहरे की रौनक को खराब कर देते हैं। आइए जानते हैं कि चेहरे पर तनाव के और क्या प्रभाव हो सकते हैं।

लाइफ स्टाइल: जानिये स्ट्रैस हमारे चेहरे पर क्या असर डालता है?

तनाव ऐसे डालता है चेहरे पर असर
क्रॉनिक स्ट्रैस यानी किसी पुराने तनाव के कारण होने वाला असर आपके चेहरे पर दो तरह से दिखाई दे सकता है। सबसे पहला, हमारा शरीर जो हार्मोन रिलीज करता है तो तनाव महसूस करने के दौरान उनमें शारीररिक रूपसे परिवर्तन हो सकता है जिनका हमारे स्वास्थ्य और शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है। दूसरा, तनाव महसूस करने पर हम दांत पीसना,होठों को काटना या चीजों को फेंकना शुरू कर देते हैं जो हमारे लिए अच्दे संकेत नहीं हें क्योंकि ये आगे चलकर अवसाद में बदल सकता है। आइए जानते हैं कि तनाव और किस-किस तरह से हमारे चेहरे पर असर डालता है।

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01. मुंहासे (Acne)
जब आप तनाव महसूस करते हैं तो आपका शरीर हार्मोन कोर्टिसोल बहुत ज्यादा मात्रा में छोड़ता है। कोर्टिसोल हमारे मस्तिष्क का एक हिस्सा है जिसे हाइपोथैलेमस के रूप में जाना जाता है। यह भी कॉर्टिकोट्रॉफिन-रिलीजिंग हार्मोन (CRH) नामक एक हार्मोन का उत्पादन करता है। सीआरएच हमारे बालों के रोम छिद्रों के चारों ओर बनी वसामय तैलीय ग्रंथियों से तेल छोडऩे के लिए उत्तेजित करता है। इन ग्रंथियों द्वारा अत्यधिक मात्रा में तेल छोडऩे से रोम छिद्रों का मुंह बंद हो जाता है जिससे कील-मुंहासे बनते हैं। हालांकि अभी तक यह माना जाता है कि तनाव मुंहासे का कारण बनते हें लेकिन इसे साबित करने वाले शोध बहुत ही कम हैं। 2017 में हुए एक अध्ययन में 22 से 24 वर्ष की आयु के बीच की मेडिकल छात्राओं के चेहरे पर मुंहासों और उनका चेहरे पर पडऩे वाले प्रभाव का अधययन किया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि बहुत ज्यादा तनाव होने पर चेहरे पर मुंहासे भी उतनी ही उच्च सतर पर नजर आते हैं और दोनों का आपस में गहरा संबंध है। ऐसे ही 2011 के एक दक्षिण कोरियाई महामारी विज्ञान के अध्ययन के अनुसार भी तनावख् नींद की कमी, शराब का सेवन और मासिक धर्म का नियमित न होने पर भी चेहरे पर मुंहासे हो सकते हैं।

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02. आंखों के नीचे उभार या सूजन (Bags under your eyes)
आंखों के नीचे बैग जैसी आकृति दरअसल आपकी पलकों के नीचे सूजन या सूजन जैसीउभार का संकेत है। यह उम्र के साथ और अधिक बड़ा होता जाता है क्योंकि आपकी आंखों के आसपास की सहायक मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। उन मांसपेशियों में लोच की कमी के कारण शुष्क त्वचा भी आई बैग बनाने में योगदान कर सकती है। 'रिसर्च ट्रस्टेड सोर्स' ने अपने शोध में पाया है कि नींद की कमी के कारण होने वाला तनाव उम्र बढऩे के कारणों को भी बढ़ाता है। जैसे चेहरे और त्वचा पर बारीक रेखाओं का उभरना, त्वचा का लचीलापन नष्ट होना और असमान पिगमेंटेशन। इतना ही नहीं त्वचा की लोच का नुकसान आपकी आंखों के नीचे बैग का भी कारण बन सकता है।

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03. रूखी त्वचा (Dry skin)
स्ट्रेटम कॉर्नियम आपकी त्वचा की बाहरी परत है। इसमें प्रोटीन और लिपिड होते हैं जो आपकी त्वचा की कोशिकाओं को हाइड्रेट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह एक सुरक्षा घेरे के रूप में भी कार्य करता है जो त्वचा के नीचे की परत की रक्षा करता है। जब आपका स्ट्रेटम कॉर्नियम पूरी क्षमता से अपना काम नहीं कर पाता तब त्वचा शुष्क और खुजलीदार होने लगती है। 2014 के एक समीक्षात्मक शोध के अनुसार इन्फ्लेमेशन एंड एलर्जी ड्रग टार्गेट्स में प्रकाशित निष्कर्ष में चूहों पर किए गए अध्ययन के हवाले से कहा गया था कि तनाव आपके स्ट्रेटम कॉर्नियम के कार्य को बाधित करता है और त्वचा में नमी बनाए रखने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। शोध की समीक्षा में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई मानव अध्ययनों ने पाया गया कि वैवाहिक व्यवधान से उत्पन्न तनाव को दूर करने से त्वचा की बाधा को स्वयं ही ठीक करने की क्षमता मिल जाती है और यह त्वचा के बूढ़े होने की प्रक्रिया को धीमा भी कर सकता है।

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04. चकत्ते या झाइयां(Rashes)
तनाव में हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करने की क्षमता होती है। एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली हमारी आंत में मौजूद 33 हजार से ज्यादा बैक्टीरिया के असंतुलन और डिस्बिओसिस के रूप में जानी जाने वाली त्वचा को जन्म दे सकती है। जब इस असंतुलन का असर हमारी त्वचा पर होता है तो स्किन पर यह चकत्ते, झाइयां, लालिमा या दाने का कारण बन सकता है। तनाव को कई हार्माेनिकल स्थितियों को ट्रिगर या उत्तेजित करने के लिए जाना जाता है। यह सोरायसिस, एक्जिमा और दाद की सूजन जैसे चकत्ते या सूजन वाली त्वचा का कारण भी बन सकता है।

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05. झुर्रियां (Wrinkles)
तनाव हमारी त्वचा में बनने वाले विभिन्न प्रोटीन के परिवर्तन का कारण भी बनता है और इसकी इलास्टिसिटी यानी लचक को कम करता है। लोच का यह नुकसान त्वचा की चुस्ती और खिंचाव के लिए जिम्मेदार कोशिकाओं में झुर्रियां पैदा कर सकता है। इतना ही नहीं तनाव से आपकी भौंह में बार-बार फुंसी हो सकती है जो झुर्रियों के निर्माण में सहयोग करती है।

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06. सफेद/ग्रे बाल, बाल झडऩा(Graying hair-hair loss)
आमतौर पर कहा जाता है कि तनाव हमारे बालों को सफेद या ग्रे कर देता है। हालांकि, यह केवल हाल ही में वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि ऐसा क्यों होता है? दरअसल, मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाएं मेलेनिन नामक एक वर्णक (pigment) का उत्पादन करती हैं जो आपके बालों को भूरा, काला, लाल, ब्लोंड रंग देता है। साल 2020 में ही 'नेचर मैगजीन' में प्रकाशित एक शोध के अनुसार तनाव से सहानुभूति तंत्रिका गतिविधि (sympathetic nervous activity) स्टेम कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है जिससे मेलानोसाइट्स गायब होने लगते हैं। एक बार जब ये कोशिकाएं गायब हो जाती हैं तो नई कोशिकाएं अपना रंग खो देती हैं और ग्रे या सफेद हो जाती हैं। क्रॉनिक स्ट्रैस यानी पुराने तनाव के कारण हमारे बालों के बढऩे की गति भी बाधित होने लगती है जो टेलोजेन इफ्लुवियम नामक स्थिति को जन्म दे सकता है। टेलोजन एफ्लुवियम की वजह से सामान्य की तुलना में बहुत ज्यादा मात्रा में बालों का झडऩा शुरू हो जाता है।

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07. तनाव से चेहरे पर होने वाले अन्य कुप्रभाव (Other ways stress affects your face)
तनाव इन संभावित तरीकों से भी हमारे चेहरे पर असर डाल सकता है-
अ. दांतों को नुकसान(Tooth Damage)-
कई लोग तनाव या चिंता महसूस होने पर दांत पीसने की आदत अपना लेते हैं। समय के साथ, यह आपके दांतों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।
ब. टेम्पोरोमैंडिबुलर ज्वाइंट डिसफंक्शन (TMD)-
टीएमडी स्वास्थ्य समस्याओं का एक समूह है जो संयुक्त रूप से चहरे और शरीर को प्रभावित करता है। टेम्पोरोमेंडिब्यूलर वह हिस्सा है जहां आपका जबड़ा आपकी खोपड़ी से जुड़ता है। यह आपके दांतों और मुंह में पायरिया या दुर्गंध आने का कारण हो सकता है।

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स. चेहरा निस्तेज होना (Face flushing)-
तनाव होने पर हम अनियमित रूप से बहुत तेज या बहुत धीरे-धीरे सांस लेते हैं और इससे सामान्य रिद्म बिगड़ जाती है। सांस लेने की ये अनियमित आदतें आपके चेहरे को अस्थायी रूप से निस्तेज कर सकती हैं।
द. होंठ चबाना (Sore lips)-
तनाव महसूस होने पर कई लोगों में अपने होठों को चबाना या अजीब तरह से मुंह चलाने की आदत होती है जो हमारे चेहरे पर बुरा असर डालता है।

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तनाव का सामना कैसे करें (How to cope with stress)-
तनाव के कुछ प्रमुख कारणों में किसी प्रियजन की अचानक मृत्यु, करीबी रिश्तों में धोखा या अप्रत्याशित रूप से नौकरी छूट जाना होता है। हालांकि, तनाव से निपटने और कम करने के तरीके भी मौजूद हैं जो आपको इससे बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद कर सकते हैं।
-सबसे पहले तो आराम की गतिविधियों के लिए समय निर्धारित करें। उन गतिविधियोंमें मन लगाएं जो तनाव होने पर आपको सुकून देती हैं।
-जीवनशैली की अच्छी आदतें बनाए रखें। लगातार स्वस्थ आहार खाने के साथ-साथ भरपूर नींद लेने से आपके शरीर को तनाव का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी।

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-हमेशा शारीरिक रूप से खुद को सक्रिय रखें। व्यायाम आपको अपने तनाव हार्मोन को संतुलित करने में मदद करता है और आपको तनाव के कारण को दूर करने के लिए कुछ समय दे सकता है।
-तनाव होने पर बात करना बंद न करें बल्कि अपने करीबी लोगों से संवाद करें। कोई एक दोस्त, परिवार के सदस्य या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करने से कई लोगों को तनाव से निपटने में मदद मिलती है।
-बेवजह कि एंटी-डिप्रेशन या स्ट्रैस की दवाओं और शराब पीने से बचें। दवाओं और अल्कोहल का लगातार उपयोग तनाव की अतिरिक्त समस्या पैदा कर सकता है।



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