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कान में तेल डालने से मानसून में फंगल इंफेक्शन बढ़ जाता है

बारिश में नमी व उमस से कानों में फंगल इंफेक्शन (ओटोमाइकोसिस) हो जाता है। इसमें कान की नलियों में एस्परजिलस या कैंडिडा नामक फंगस हो जाते हैं। सर्दी-जुकाम से भी यह समस्या बढ़ जाती है।
लक्षण: कान में भारीपन, दर्द, खुजली, कान से पस आना, कान बंद होने जैसे महसूस होना, कुछ लोगों के पर्दे में छेद होना और सुनाई कम देता है।
कारण: जिनके कान पहले से ही बहते हैं उनमें भी यह जल्दी पनप जाते हैं। कान में कुछ न डालें। खुद कान की सफाई न करें। तेल या दूसरी चीजें कान में डालने से फंगस तेजी से फैलते हैं।
इलाज: इसमें एंटीफंगल ईयर ड्रॉप्स या कोई क्रीम लगाने को देते हैं। कानों को सूखा रखें। इसमें पानी न जाने दें। नहाते समय कान में तेल या जैल के बाद रुई लगाएं।
सावधानी: कानों की नियमित सफाई की जरूरत नहीं होती है। वैक्स निकालने के लिए खुद ही ईयरबड, तीली या अंगुली न डालें। कानों में फुंसी व सूजन होने पर खुजली-दर्द होने लगता है। वैक्स समझकर निकालने से परेशानी बढ़ सकती है।
डॉ. शुभकाम आर्य, ईएनटी सर्जन



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