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गरीबी और बेरोजगारी से उपजा अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है-शोध

अवसाद (Depression) बीते कुछ दशकों में एक गंभीर स्वास्थ्य मुद्दा (Serious Health Issue) बनकर उभरा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organsation) के अनुसार अवसाद दुनिया भर में 'डिसएबिलिटी' (Disability) का प्रमुख कारण है और इस बीमारी के वैश्विक वृद्धि का एक बड़ा कारण भी है। दुनिया में करीब 264 मिलियन (26.4 करोड़) से अधिक लोग अवसाद से पीडि़त हैं। वहीं अवसाद के चलते आत्महत्या (Suicide due to Depression) करने वालों की संख्या भी 8 लाख तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि आत्महत्या करने वाले ज्यादातर लोगों की उम्र 15 से 29 साल के युवाओं की है। व्यक्तिगत पारिवारिक मुद्दे अवसाद का सबसे प्रमुख कारण हैं। वहीं अवसाद के अन्य कारणों में बेरोजगारी (Unemployment), शोक (Grief) और मनोवैज्ञानिक आघात (Psychological trauma) भी हैं। लेकिन शोध बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अवसाद होने की अधिक आशंका होती है। हालांकि एक नए अध्ययन में यह भी सामने आया है कि निर्धनता (Poverty) के कारण उपजा अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है।

गरीबी और बेरोजगारी से उपजा अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है-शोध

बेरोजगार पुरुष ज्यादा अवसादग्रस्त
ब्रिटेन (Britain) में पुरुषों और महिलाओं के बीच अवसाद के प्रभावों व जोखिमों की जांच करने वाले एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि ब्रिटेन में वंचित क्षेत्र (Poor Area) में रहने वाले पुरुष पॉश एरिया में रहने वाले पुरुषों की तुलना में 50 फीसदी अधिक उदास, अवसाद और तनाव में रहते हैं। जबकि महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गरीबी का इतना गहरा प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाएं अपने पारिवारिक संबंधों, विवाह जैसे मुद्दों के चलते अधिक उदास रहती हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Foram) के हाल ही प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार व्यक्ति के आसपास के क्षेत्र में अगर बेरोजगारी, गरीबी और अभाव ज्यादा है तो यह अवसाद पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। इन कारणों से होने वाला अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है।

गरीबी और बेरोजगारी से उपजा अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है-शोध

आत्महत्या में तीन गुनी वृद्धि
पुरुषों और महिलाओं के बीच अवसाद के प्रभावों की जांच करने वाले इस अध्ययन के अनुसार पुरुषों में गरीबी, वित्तीय संकट, बेरोजगारी, भोजन और अन्य मूलभूत आवश्यकताओं की कमी बहुत अखरती है। शोध में इन मूलभूत आवासीय मुद्दों का महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव दर्ज नहीं किया गया था। लेकिन पुरुषों में इस अवसाद के कारण महिलाओं की तुलना में आत्महत्या करने की आशंका तीन गुना अधिक होती है। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि पुरुष मुख्य योजनाओं या कार्यों में विफल होने पर अवसाद से ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसमें ऑफिस में दिए गए टास्क को पूरा न कर पाना या परिवार को बेहतर आर्थिक जीवन न दे पाना शामिल है।

गरीबी और बेरोजगारी से उपजा अवसाद महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है-शोध

महिलाओं में अवसाद के प्रमुख कारण
अध्ययन में कहा गया है कि महिलाएं रिश्तों में सामंजस्य न बिठा पाने और अपनी सामाजिक नेटवर्किंग (Social Networking) के अच्छा न होने के कारण अवसाद का शिकार होती हैं, जिसका वे हिस्सा हैं। माता-पिता के प्यार की कमी, अपने विवाह से संतुष्ट न होना ऐसी कुछ परेशानियां हैं जो महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health of Women) को गहराई से प्रभावित करती हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अध्ययन में यह भी कहा गया है कि वंचित क्षेत्रों में रहने वाले पुरुषों की तुलना में महिलाओं में उन मुद्दों को लेकर अवसाद कम हो तो भी चिंता अधिक होती है।



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