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कुदरती खुबसूरती संग त्वचा को भी नुकसान क्रीम से गोरेपन के साइड इफेक्ट

बाजार में गोरे होने के हजारों क्रीम बिक रहे हैं। इनका इस्तेमाल में भी खूब हो रहा है लेकिन इन्हें लगाने वाला गोरा नहीं होता है बल्कि उल्टे इन क्रीम का साइड इफेक्ट के कारण बहुत मरीज हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं। फेयरनेस क्रीम से स्किन को अस्थाई व स्थाई दोनों रूप से नुकसान हो सकता है। कई बार कुदरती खूबसूरती तक भी खत्म हो जाती है। जानते हैं इसकी वजह-
लड़कियों के चेहरे पर बाल
शुरू में इन क्रीम को लगाने से ऐसा लगता है कि चेहरे की चमक बढ़ रही है, पर असल में क्रीम के साइड इफेक्ट्स से स्किन पतली हो जाती है। इसकी वजह डीपिगमेंटेशन होता है। ऊपरी सेल्स डैमेज होते हैं। बाद में चेहरा लाल पडऩे लगता है जिसे रोशिया कहते हैं। थोड़ी धूप में भी परेशानी साफ दिखने लगती है। इन क्रीम से कुछ लड़कियों के चेहरे पर अनचाहे बाल निकल आते हैं। धीरे-धीर इसके दुष्प्रभाव से शरीर की इम्युनिटी भी घटने लगती है।
क्या होता है इन क्रीम्स में
फेयरनेस क्रीम्स में अधिक मात्रा में बेटामेथासोन, मोमेंटासोन और कोबेटासोल जैसे स्टेरॉयड इस्तेमाल किए जा रहे हैं। साथ ही मरकरी-हाइड्रोक्विन का इस्तेमाल अधिक मात्रा में किया जाता है। इससे कुछ मरीजों की स्किन से खून निकल आता है। नसें तक दिखने लगती हैं। फंगल इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है। क्रीम खरीदते समय ध्यान देना चाहिए कि उनमें ये सब न हो।
...गोरे नहीं हो सकते
किसी भी क्रीम से पुरुष या महिला स्थाई रूप से गोरे नहीं हो सकते हैं। हो सकता है कि थोड़ी देर के लिए चेहरे की चमक बढ़ जाए। ऐसे क्रीम्स के प्रचार के झांसे में नहीं आएं। यदि धूप की वजह से स्किन काली (टैनिंग) होती है तो इसकी सुरक्षा के लिए सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करें। त्वचा में नमी बनी रहे इसलिए जरूरत के अनुसार नारियल का तेल, एलोवेरा जेल और मॉइश्चराइजिंग क्रीम आदि लगाएं।
अपने मन से न लगाएं ऐसी क्रीम
स्टेरॉयड का दवाओं में इस्तेमाल सीमित मात्रा में किया जाता है। मरीज को कितनी मात्रा में स्टेरॉयड की जरूरत है, डॉक्टर को पता होता है। कम या ज्यादा मात्रा से मरीज को नुकसान होता है। त्वचा अधिक संवेदनशील हो जाती है। बिना डॉक्टरी सलाह ऐसी कोई क्रीम न लगाएं।
भ्रामक प्रचार पर रोक लगाना चाहिए
अभी हाल ही एक क्रीम बनाने वाली कंपनी ने क्रीम से गोरे होने के बात हटाने के लिए कहा है। इसका स्वागत करना चाहिए। हमें समझना चाहिए कि किसी की पहचान रंग से नहीं बल्कि उसकी व्यक्ति गत खुबियों से होनी चाहिए। हमारी पहचान कुदरती खुबसूरती है। भ्रामक प्रचार पर रोक लगाना चाहिए। इससे नुकसान होता है।
काउंटर से न बेचा जाए
त्वचा रोग विशेषज्ञों के संगठन इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट वेनोरियोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (आइएडीवीएल) भी चाहता है कि इन क्रीम्स का दुरुपयोग रुके। इसलिए आइएडीवीएल की मांग है कि इन क्रीम्स को ओवर द काउंटर नहीं बेचा जाए। जब तक सरकार इस पर फैसला नहीं करती है। लोगों को ही जागरूक होना चाहिए। ऐसे क्रीम खुद खरीदने से बचें।
डॉ. किरन वी. गोडसे, वरिष्ठ त्वचा रोग विशेषज्ञ, डीवाई पाटिल मेडिकल कॉलेज, मुंबई एवं अध्यक्ष, इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनोरियोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट



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