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18 किलो चीनी सालाना खा रहे हम, अहमदाबाद में पुरुष और मुंबई में महिलाएं चीनी खाने में आगे

चीनी जिसे शर्करा और शुगर भी कहते हैं प्राकृतिक रूप से बहुत सारे फलों, सब्जियों यहां तक कि दूध में भी पाई जाती है। वहीं स्वाद और इन्ग्रेडिएंट्स के मिश्रण के लिए एडेड शुगर (Added Sugar) केंडी, शीतल पेय, बेक किए हुए उत्पादों में भी मिलाई जाती है।हाल ही जारी एक नए अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि देश के सभी मेट्रो शहरों में अतिरिक्त चीनी (एडेड शुगर) का दैनिक सेवन 19.5 ग्राम प्रतिदिन था। यह मात्रा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रीसर्च (ICMR) की ओर से तय किए गए स्तर की तुलना में 30 ग्राम प्रतिदिन कम है। अध्ययन में यह भी सामने आया है कि आईसीएमआर द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत के मेट्रो शहरों में अतिरिक्त चीनी का सेवन प्रति दिन ग्राम में मापा गया जिसमें मुम्बई पहले स्थान पर और हैदराबाद सबसे निचले पायदान पर थे। राष्ट्रीय पोषण संस्थान (NIN) हैदराबादए और अंतर्राष्ट्रीय जीवन विज्ञान संस्थान (ILSI-India) के शोधदल ने यह अध्ययन किया है।

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1 साल में 18 किलो चीनी खा रहे हम
आइसीएमआर, आइएलएसआइ-इंडिया और एनआइएन के अपनी तरह के इस पहले संयुक्त अध्ययन का उद्देश्य भारत के सात प्रमुख मेट्रो शहरों में रहने वाले शहरवासियों की एडेड शुगर की खपत के बारे में जानकारी हासिल करना था। यह अध्ययन सूक्ष्म रूप से कुपोषित, अति कुपोषित और कुपोषितों के बारे में जानकारी जुटाने और गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) को रोकने में मदद करने के लिए भी काफी महत्त्वपूर्ण है। हालांकि भारत उन शीर्ष दस देशों में शामिल नहीं है, जो 18 मार्च, 2019 को जारी WORLD ATLAS के अनुसार सबसे अधिक चीनी खाने वाले देश हैं। लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं कि भारत में तेजी से चीनी की खपत बढ़ रही है। उदाहरण के लिएए 2018-19 में, देश में चीनी की खपत लगभग 27.5 मिलियन (2.75 करोड़) मीट्रिक टन थी जो पिछले वर्ष में 26.5 मिलियन (2.65 करोड़) टन हो गई थी। एक शोध के अनुसार एक औसत भारतीय सालाना 18 किलो चीनी कन्ज्यूम करता है जो प्रतिदिन 10 चम्मच के बराबर है।

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हृदय रोगों में 25 फीसदी की वृद्धि
हालांकि अभी तक ज्यादातर शोध ने बहुत ज्यादा मात्रा में चीनी की खपत को टाइप-२ डायबिटीज का कारण नहीं माना है। लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि तय मानक से ज्यादा मात्रा में चीनी का उपभोग हृदय रोगों संबंधी खतरों (कार्डियोवस्कुलर डिजीज या CVD) का जोखिम और जान का खतरा बढ़ा देता है। जो लोग अपनी दैनिक जरुरत की कैलोरी (ऊर्जा) का 25 फीसदी हिस्सा चीनी से हासिल कर रहे थे उनके हृदय रोग से मरने की संभावना दोगुने से भी अधिक थी। जबकि जो केवल 10 फीसदी ऊर्जा चीनी से प्राप्त कर रहे थे उनमें ऐसा होने की बहुत कम संभावना थी।

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वयस्क और बुजुर्ग सबसे आगे
विभिन्न आयु वर्ग पर किए परीक्षण में सामने आया कि भारत में बुजुर्ग और वयस्क युवाओं-किशोरों की तुलना में तय मानकोंसे ज्यादा चीनी खा रहे हैं। 36 से 59 वर्ष की आयु वर्ग के लोग 20.5 ग्राम प्रतिदिन, 60 वर्ष या इसे ज्यादा की उम्रके लोग 20.3 ग्राम प्रतिदिन चीनी का उपभोग कर रहे हैं। किशोरों में यह खपत 19.9 ग्राम प्रतिदिन और युवा वयस्कों की आयु वर्ग में प्रति दिन 19.4 ग्राम की खपत दर्ज की गई। वहीं देश के नौनिहालों की बात करें तो स्कूली बच्चों में यह दर 17.6 ग्राम प्रतिदिन और प्री-स्कूली बच्चों में 15.6 ग्राम प्रतिदिन चीनी की खपत दर्ज की गई।

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अहमदाबाद में पुरुष, मुम्बई में महिलाएं आगे
आमतौर पर माना जाता है कि पुरुषों को मीठा और महिलाओं को खट्टा या नमकीन पसंद होता है। लेकिन सर्वे में नतीजे इसके बिल्कुल उलट थे। चीनी खाने के मामले में महिलाओं ने यहां भी पुरुषों को पीछे छोड़ दिया। पुरुषों के 18.7 ग्राम प्रतिदिन की तुलना में भारतीय गृहिणियां और वर्किंग वुमन 20.2 ग्राम चीनी प्रतिदिन खा रही हैं। वहीं मेट्रो शहरों की बात करें तो सात बड़े शहरों में अहमदाबाद को छोड़कर सभी शहरों में एक ही सी प्रवृत्ति दिखाई दी। जहां पुरुष और महिलाएं लगभग बराबर मात्रा में चीनी का सेवन कर रहे थे। जबकि अहमदाबाद में पुरुषों की खपत 25.7 ग्राम प्रतिदिन है, वहीं महिलाएं 26 ग्राम प्रतिदिन से अधिक चीनी से बने व्यंजनों का स्वाद ले रही हैं। पुरुषों और महिलाओं के बीच अतिरिक्त चीनी की खपत में असमानता अन्य शहरों की तुलना में मुंबई में अधिक नजर आई। मुंबई में महिलाएं 28 ग्राम प्रतिदिन चीनी का उपभोग करती हैं जबकि पुरुषों का सेवन केवल 24.4 ग्राम प्रतिदिन है।

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शोध में यह चौंकाने वाले तथ्य भी शामिल
-26.3 ग्राम प्रतिदिन मुंबई और 25.9 ग्राम प्रतिदिन चीनी की खपत के साथ दोनों शहर अन्य पांच महानगरों की तुलना में अधिक चीनी का उपभोग कर रहे हैं
-5 फीसदी ही ऊर्जा मिल रही है चीनी के उपभोग से कुल हासिल कैलोरी का प्रतिदिन
-35 से 59 आयु वर्ष की बुजुर्ग शहरी आबादी अन्य आयु वर्ग की तुलना में अधिक शक्कर का सेवन कर रही है
-18.3 ग्राम प्रतिदिन की दर से पेशेवर कर्मियों की तुलना में मजदूर वर्गमें चीनी का उपभोग अधिक था। ऐसे ही उच्च शिक्षित आबादी की तुलना में कम शिक्षित आबादी में अतिरिक्त चीनी का सेवन अधिक था
-ऐसे ही दूध, जई के साथ चावल, मकई और दूध के साथ ओट्स जैसे व्यंजनों में चीनी का सेवन अधिक पाया गया। वहीं मसाला चाय, सामान्य चाय, कॉफी, मिल्क शेक और लस्सीए आदि के साथ अधिक मात्रा में चीनी का सेवन किया जाता है
-5.1 फीसदी थी सभी राज्यों में कैलोरी की औसत खपत
-6.6 ग्राम प्रतिदिन की दर से मुम्बई पहले, 6.1 के साथ दिल्ली, 5.9 के साथ अहमदाबाद, 5.4 ग्राम प्रतिदिन की दर से हैदराबाद, 4.1 के साथ बैंंगलुरु, 3.9 की दर से चेन्नई और 3.5 ग्राम प्रतिदिन की दर से कोलकाता ने लिस्ट में जगह पाई है



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